अब ज़िंदगी की किताब पूरी होने को है,
तुम मेरी आख़िरी मोहब्बत हो।
वसीयत के कुछ आख़िरी सफ़े बाकी हैं बस…
और सुन लो—
इसके बाद न कोई ख़्वाहिश होगी,
न किसी और को चाहने की वजह।
जो दिल तुम्हारे नाम कर दिया है,
वो अब आख़िरी साँस तक तुम्हारा ही रहेगा।
By Ajay Gautam
