Ajay Gautam Associates is a reputable Pan-India legal services firm offering comprehensive legal assistance across various domains and courts in India

News And Articles To Read

वो मुझे देखकर भी बेपरवाह-सा रहेगा, मैं उसे देखकर भी संभला हुआ लगूँगा नहीं।

वो मुझे देखकर भी बेपरवाह-सा रहेगा,
मैं उसे देखकर भी संभला हुआ लगूँगा नहीं।

उसे देखकर मेरे चेहरे पे शिकन आएगी नहीं,
मैं ख़ुश हूँ ये बात मगर दिल मानेगा नहीं।

वो पूछेगा हाल मेरा, मैं हँसकर कह दूँगा “ठीक हूँ”,
मेरी आँखें मगर इस झूठ को छुपाएँगी नहीं।

वो समझेगा कि मुझे उसकी कमी रही ही नहीं,
मैं समझाऊँगा भी तो उसे यक़ीं आएगा नहीं।

वो ख़ुश है मेरे बिना—ये देखकर सुकून मिला,
मगर दिल को ये सुकून एक पल भी मिला नहीं।

हम दोनों ही अजनबी बनने का हुनर जानते हैं,
वो देखकर भी पहचानेगा नहीं, मैं भूलूँगा नहीं।

उसके चेहरे पे ख़ुशी देखकर ख़ुश तो हुआ मैं,
मगर इस ख़ुशी में मेरा हिस्सा था—लगा नहीं।

वो सामने था तो लगा सब ठीक है अब,
वो चला गया तो लगा कुछ ठीक था ही नहीं।

वो पूछेगा तो कह दूँगा, “हाँ, भूल गया हूँ तुझे”,
मगर ये झूठ मेरी आँखों से छुपेगा नहीं।

वो मेरी ख़ामोशी को सुकून समझ बैठेगा,
मैं क्या करूँ, मेरा दर्द भी अब बोलेगा नहीं।

वो समझता है कि मैं आगे बढ़ चुका हूँ बहुत,
उसे क्या ख़बर, मैं ख़ुद से भी आगे बढ़ा नहीं।

वो ख़ुश दिखा तो मैंने भी ख़ुशी जताई,
मेरी आँखों ने मगर मेरा साथ दिया नहीं।

उसे खोकर भी उसे खोया हुआ कहूँ कैसे,
वो पास नहीं है मगर दिल से गया नहीं।

हमारी कहानी का अंत इतना ख़ामोश था,
वो चला गया और मुझे पता भी चला नहीं।

मैंने चेहरे पर हँसी रख ली हमेशा की तरह,
लोग समझते रहे कि मुझे दर्द हुआ ही नहीं।

वो पूछता रहा, “अब भी याद करता है मुझे?”
मैंने कहा, “नहीं”—और फिर कुछ कहा नहीं।

कितना आसान था उसे देखकर मुस्कुराना,
कितना मुश्किल था फिर मुड़ कर मुस्कुराना वंही।

By Ajay Gautam

Call Now: +91-7974026721